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संझा के समय नदी किनारे डैक्रियन मैजिकल गर्ल्स रूप बदलती हैं, कीड़े जैसे गिरे हुए शिशुओं के झुंड का मुकाबला करने को तैयार। "उस पल हमने कभी कल्पना भी नहीं की थी… कि बात यहां तक पहुंच जाएगी…" घेर लिया गया, उन पर चिपचिपा लार थूका गया जिसने उन्हें जकड़ लिया। टेंटेकल्स उनके शरीर पर रेंगते, हर इंच चाटते, हर छेद में घुसते — आखिरकार सबसे संवेदनशील हिस्सों पर बेरहमी से हमला करते हुए। शरीर में बदलाव महसूस करते ही तीन योद्धा जमीन पर गिरीं, वीर्य से लथपथ, आंखें खाली, शरीर ऐंठन में। फिर निचले पेट पर चमकदार कामुक चिह्न उभरे, भयानक रोशनी में धड़कते, ऐसी वासना जगाते जो अब रोकी न जा सकी। "और फिर… वह पल आ ही गया।" हारकर बदहाली में गिरे हुए देवदूतों और राक्षसों की दुनिया में कैद। सामने खड़ी थी सबकी जड़ — गिर गई पवित्र माता।